Shreeramrasayan (English)

This work, Shree Ramrasayan, is the essence of the life story of Shree Prabhu Ramachandra from his birth till Ramrajya was established in Ayodhya. The pictures given in it correspond respectively to various episodes in this life story. Ravan symbolises the ill-fate and vicious ego, which brings fear into human life. Sadguru Aniruddha says, “Ravan, who represents ill-fate, steals Janaki and takes her away from Ram. Janaki represents peace and contentment. However, it is Ram who brings about the end of Ravan. The ego, as in the ‘I’, is Ravan’s life force, and the six foes, viz., desire, fury, lure, etc., form the fundamental substance of his mind. Vile inclinations and ill-fate that trouble me are certainly destroyed. But when? When I become a Vanarsainik of Ram.

Matruvaatsalyavindaanam (English)

This great work has taken form from the dialogue between ShreeGuru Dattatreya and His disciple Shree Parshuram. It is an easy and simple account of the Aadimata Chandika’s Tridha form that is the Aadimata Gayatri, the Aadimata Mahishasurmardini and the Aadimata Anasuya. Describing this memoir, Sadguru Shree Aniruddha writes – “This is a sacred work, this is a gunasankirtan or praise of the attributes, it is the Ganges of knowledge, it is also the Bhagirathi of Bhakti (bhakti that flows from the bhakta back to the source, the Almighty) and, of course, the narrative about the Aadimata. But over and above all of this, it is the Shubhankara and the Ashubhanashini manifestation of my Aadimata; it is Her gentle motherly affection, and it is also Her grace and blessing.”

Matruvatsalya Upanishad (Marathi)

श्रद्धावानांच्या प्रेमापोटी, त्यांच्या जीवनाला उचित दिशा मिळावी ह्या कळकळीपोटी सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापूंनी आपल्याला दिलेले आदिमातेच्या प्रेमकृपेचे आश्वासन. आई चण्डिकेची क्षमा, रक्षण आणि अर्थातच आधार ह्या ग‘ंथामधून आपल्यापर्यंत ते पोहोचवतात. श्रद्धावानाच्या मनातील सर्व प्रश्‍न, भय दूर करून भक्ती आणि सामर्थ्य दृढ करणारा हा सर्वश्रेष्ठ ग‘ंथ आहे. हा हितकारक बदल घडवणारा हा ग‘ंथ केवळ दिशादर्शकच नाही तर चण्डिकाकुलाच्या प्रेमामुळे ह्या दिशेने प्रवास करण्याची ताकदही देतो. आई चण्डिकेकडे नेणारा मार्ग सदैव खुला असतो, द्वार उघडे असते ही जाणीव करून देणारा हा ग‘ंथ आपल्या आतमधली अनेक बंद द्वारे अलगद उघडतो, आपल्या आतमधील अनेक अडथळे अलगद दूर करतो आणि ह्या आईच्या कृपेच्या मोकळ्या मार्गावर आणतो. असे जेव्हा घडते, तेव्हाच आईच्या जवळ नेणार्‍याखुल्या द्वाराची जाणीव होते. आणि हे कार्य हा ग‘ंथ, म्हणजेच सद्गुरुंचा कळकळीचा शब्द नक्कीच साध्य करतो.

The Third World War (Marathi)

On the 11th of September 2001, i.e. no sooner had the third millenium begun, than every nation in the world began to reflect over its protection and to consider afresh its future political policies. ……. The misery inflicted by terrorist activity that India had been suffering through many years, boomed so powerfully into the face of the U.S.A. that it ended up scorching it completely. And the U.S.A., that had hitherto constantly turned a blind eye towards the evidence presented by India, was forced to roll up its sleeves and prepare to fight terrorism, the very terrorism that it had once nurtured and fostered.



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The Third World War (English)

The subject of this book is not merely terrorism or anti-terrorism war based on the study of events that have occurred till now; it is a reflection over the possibilities that will unravel in the times to come. There is no doubt that over the next twenty to twenty-five years, conflict will become an aspect of everyday doings and in every region on earth. This is not telling the future. This is a study, a study of history and of the present circumstances…

INDEX – And yet again because (Preface to 2nd edition) >> Only because…. >> The First World War >> Four super-powers join the War >> Defeat of Germany, Treaty of Versailles >> Misery of German economy, Hitler is born >> Hitler pledges to retrieve lost German glory >> The Era of ‘prolonged wars’ >> The decisive war now begins… >> Riotous display of arrogance and conceit of Hitler, the dictator >> ‘The Cold War’, China’s plunge in the world market >> India’s position in new global stratagem of new era >> A troublesome triad (China, Pakistan, North Korea) >> The foundation stone of the Third World War >> Al Qaeda – ‘The factory of terrorism’ >> It is “he”, who will initiate the Third World War >> Saudi Arabia >> Pakistan >> Would its military be able to maintain unity and integrity of Pakistan? >> Afghanistan >> What exactly is a world war? >> The Third World War -Point of origin >> Iran and its links with terrorist organizations >> State of affairs in the Indian sub-continent >> Bangladesh >> Sri Lanka >> Myanmar >> Nepal >> Condoleezza Rice >>  China >> Taiwan >> Latin America >> Cuba >> The African Continent >> Pakistan – Ambassador of misfortune for the world >> Insight into the terrorist era beginning 06.06.2006 (6.6.6.) >> India-A Mahabharat all over again >> The Third World War: The Likely Design >> What does Nostradamus, the ancient mystic have to say? >> Modern weaponry and its impact >> Nuclear Weapons >> Missiles >> Chemical warfare >> Biological warfare >> Naval warfare >> Desert warfare >> Space warfare >> Guerilla warfare >> Pressure tactics as technique of warfare >> Trends events and efforts that could help avoid the Third World War

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Shreeramrasayan (Marathi)

हा ग्रंथ म्हणजे श्रीप्रभूरामचंद्रांच्या जन्मापासून अयोध्येत रामराज्य स्थापन होईपर्यंतच्या रामकथेचे जीवनसार आहे. यातील चित्रेसुद्धा त्या त्या कथेच्या अनुषंगाने आहेत. रावण हा प्रतीक आहे द्रुष्प्रारब्धाचा व तामसी अहंकाराचा, ज्यामुळे मनुष्याच्या जीवनामध्ये भय उत्पन्न होते. सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध सांगतात, ’दुष्प्रारब्धरूपी रावण आपल्या जीवनातून शांतीतृप्तीरूपी जानकीला पुरुषार्थरूपी रामापासून वेगळे करतो. अहंकार हाच ज्याचा प्राण आहे आणि काम, क्रोध, मोहासारखे षड्‌रिपू अशी ज्याच्या मनाची मूलद्रव्यं आहेत अशा रावणाचा वध रामाकडूनच होतो. मानवाला सतावणार्‍या अशा दुष्प्रवृत्ती व दुष्प्रारब्धाचा नाश होतोच. पण केव्हा? जेव्हा आपण रामाचे वानर बनतो तेव्हा.’

Shreeramrasayan (Hindi)

‘राम्रसायन’ सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापूजी रचित भगवन श्रीराम की जीवणी है मगर यह केवल अनुवाद नहीं है। ‘राम्रसायन’ भगवान श्रीराम की जीवनगाथा जरुर है, परन्तु कुछ हद तक यह घटनाएं हर युग में और सभी मानवों की जिंदगी में घटती हैं। हरएक की भूमिका – चाहे वे श्रीराम के सद्गुण हों या रावण की चरित्रहीनता हो, वे हर समय हमारे जीवन में घटते हैं। इन बातों को ‘प्रेमप्रवास’ (श्रीमाद्पुरुशार्थ ग्रंथराज का दूसरा भाग) में समझाया गया है। पाठक इन बातों को अपने जीवन से जोड़कर इन से निरंतर मार्गदर्शन पाता है। यह केवल अपनी पत्नी सीता को दुष्ट रावण के चुंगल से छुड़ाने की बात नहीं है। हम भक्तों के लिए मानो भगवान की यह लड़ाई भक्ति को प्रारब्ध के चुंगल से छुड़ाकर वहीँ ले जाने के लिए है जहाँ से वह आई है – भगवान के पास। भगवान एक सामान्य इन्सान की तरह जीवन व्यतीत करते हुए, उपलब्ध भौतिक साधनों की सहायता से और कठिन परिश्रम करते हुए पवित्र मार्ग पर चलकर बुराई पर विजय हासिल करते हैं। यह हमारी प्रेरणा के लिए है। यह पवित्र प्रेम, दृढ विश्वास और हनुमानजी के समर्पण के साथ साथ विपरीत परिस्थितियों में होते हुए बिभीषण के अटूट विश्वास के बारे में है। इस की वजह से यह एक ‘रसायन’ है – यह निरंतर पुनरुद्धार एवं वास्तविक शक्ति का जरिया है। एक ओर, यह हमें वानर सैनिक बनने की प्रेरणा देता है, जो भगवान और राजा श्रीराम के भक्त थे, तो दूसरी ओर सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापूजी कहते हैं कि यह रचना दत्तगुरु के चरणों में अर्पण रामगुणसंकीर्तन की पुष्पांजलि है।
और यही तो इस रचना की सुन्दरता है। इस रचना में चित्र विस्तृत और गूढ़ हैं जो हमें उन घटनाओं की गहराई तक ले जाते हैं मानो वे घटनाएँ हमारे समक्ष, हमारी जिंदगी में घट रही हैं।

Shreemad Pursharth Granthraj - Prempravas Standard Edition (Hindi)

प्रत्येक जीव की, बल्कि इस समूचे विश्व की यात्रा…………यह विश्व जिस से निर्माण हुआ, जिस ही में इसका लय होता है, ‘वही’ एकमात्र अंतिम सत्य, प्रेम का मूल स्रोत है, और आनंद का भी । मानवजीवन का सर्वोच्च हेतु भी वो ही – भगवंत है । इस भगवंत की दिशा में गति करना यह यात्रा है और भगवंत – सदगुरु-परमात्मा अपना ध्येय । अपनी यह यात्रा भगवंत के ही प्रेम से प्रेरित होने से वह आनंदमय और परिपूर्ण होती है । यह प्रेम ही सामर्थ्यदाई, पुरुषार्थ और निर्भयता देता है । भगवंत के प्रेम का अहसास यात्रा को भक्तिमार्ग पर दृढ करता है । ‘प्रेमप्रवास’ ग्रंथ एक ऐसे ही सुन्दर यात्रा का आश्वासन है क्योंकि प्रत्येक की यात्रा भगवंत की (प्रेम) दिशा में और भगवंत के (प्रेम) सहवास में ही करनी होती है । यह यात्रा प्रत्येक के जीवन में कैसे घट सकती है और उसके लिए कौनसे प्रयास घटने होते हैं यह सदगुरु श्रीअनिरुद्ध बापूजी सहज-सरल शब्दों में हमें समझाते हैं । ‘पूर्वरंग’ में यह भगवंत कैसा अनंत, अपार है यह हम समझ लेते हैं। ‘श्रीरंग’ में इस अनंत भगवंत का बिलकुल हर जीव पर असीम प्रेम होता ही है, ताकि हम उसके पास जाएँ। भक्ति बढ़ने के लिए कौनसे प्रयास करने चाहिएं इस बात को हम जान लेते हैं – अपना विकास होने के लिए आहार में बदलाव करने से लेकर जीवन में समय के, कार्य के नियोजन के बारे में भी मार्गदर्शन किया गया है । ‘मधुफलवाटिका’ यह तीसरा विभाग वानरवीरों का विश्रम्स्थान है जहाँ के फल ओज, सामर्थ्य तथा निश्चितरूप से आनंद प्रदान करते हैं । अर्थात, सदगुरु श्रीअनिरुद्धबापू जिस श्रीमद्पुरुषार्थ को जीस ‘मधु’ की मिसाल देते हैं वैसी ही औषधि एवं मधुरता से परिपूर्ण है ।

Shreemad Pursharth Granthraj - Satyaprawesh Economy Edition (Marathi)

‘सत्यप्रवेश’ हा श्रीमद्पुरुषार्थ ग‘ंथराजाचा पहिला खंड असून सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूंच्या जीवनकार्याला अनुसरून गृहस्थजीवनामध्ये राहून परमार्थ प्राप्तीची म्हणजेच नरजन्माचा सर्वश्रेष्ठ हेतू साध्य करण्याचा मार्ग दिग्दर्शित करतो. हा मार्ग आहे सामान्य जीवनामध्ये
भक्ती व निष्काम कर्मयोगाचा भक्ती व सेवेचा सहज समावेश, प्रवेश घडवून आणणारा; भगवंताच्या प्रेमाची जाणीव सतत जागृत ठेवणारा आणि म्हणूनच धैर्य, निर्भयता व पुरुषार्थ ही मूल्ये जीवनामध्ये बाणवणारा.
भक्ती, पुरुषार्थ ह्यांचा नेमका व खरा अर्थ समजावून समाजामध्ये रुजलेल्या चुकीच्या समजुती, अंध विश्‍वास आणि भय ह्यांपासून मुक्त करणारा व आनंदी आणि विवेकी गृहस्थ व सामाजिक जीवन घडवणारा.
‘सत्यप्रवेश’ एका अशा सुंदर क्षेत्राचे दरवाजे खुले करून देतो जिथे भगवंताच्या प्रेमाची सतत जाणीव हेच सर्वोच्च सत्य असतं व मग प्रत्येक श्रद्धावानाचा ह्या सुंदर क्षेत्री प्रवेश म्हणजेच ‘सत्यप्रवेश’ घडतो.

Ramnaam Book (Set of 4)

Ramnaam Book (Print Copy – 4 Books in one set)

Aniruddha’s Universal Bank of Ramnaam implies a notebook which gives the devotees an opportunity to recollect the sacred name of God. Every page of the book has Lord Hanumanta’s image watermarked in the background, on which the devotees get the golden opportunity to write various names of God. While writing Ramnaam notebook we get connected with the divine name of the Lord which we chant while writing it. This is the biggest benefit of writing the Ramnaam books.

Shreemad Pursharth Granthraj - Prempravas Economy Edition (Marathi)

प्रत्येक जीवाचा, किंबहुना ह्या सर्व विश्‍वाचाच प्रवास……… हे विश्‍व ज्याच्यामधून उद्भवले, ज्याच्यामध्येच ते लय पावते, ‘तो’च एकमेव अंतिम सत्य, प्रेमाचा मूळ स्रोत आणि आनंदाचाही. मानवजीवनाचा सर्वोच्च हेतूही तोच – भगवंत. ह्या भगवंताच्या दिशेने गती करणे हा प्रवास आणि भगवंत – सद्गुरु-परमात्मा आपले ध्येय.
आपला हा प्रवास भगवंताच्याच प्रेमाने प्रेरित असल्यास तो आनंदी आणि परिपूर्ण होतो. हे प्रेमच सामर्थ्यदायी, पुरुषार्थ व निर्भयता देते. भगवंताच्या प्रेमाची जाणीव प्रवास भक्तीमार्गावर दृढ करते.
‘प्रेमप्रवास’ हा ग‘ंथ ह्या अशाच सुंदर प्रवासाचे आश्‍वासन आहे कारण प्रत्येकाचा प्रवास भगवंताच्या (प्रेम)दिशेने आणि भगवंताच्या (प्रेम) सहवासातच करायचा असतो. हा प्रवास प्रत्येकाच्या जीवनामध्ये कसा घडू शकतो आणि त्यासाठी कोणते प्रयास घडावे लागतात ते सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापू सहज-सोप्या शब्दांत आपल्याला सांगतात.
‘पूर्वरंगा’मध्ये हा भगवंत कसा अनंत, अपार आहे ते आपण समजून घेतो. ‘श्रीरंगा’मध्ये ह्या अनंत भगवंताचे अगदी प्रत्येक जीवावर असीम प्रेम असतेच, आपण त्याच्याजवळ जाण्यासाठी, भक्ती वाढवण्यासाठी काय प्रयास घ्यावे हे आपण समजून घेतो. – आपला विकास घडण्यासाठी अगदी आहारामध्ये करण्याचे बदलही आणि जीवनामध्ये वेळेचे, कार्याचे नियोजन ह्याबद्दलही मार्गदर्शन आपल्याला मिळते. ‘मधुफलवाटिका’ हा तिसरा विभाग म्हणजे वानरवीरांचे विश्रामस्थान – जेथली फळे ओज, सामर्थ्य व अर्थातच आनंद देणारी आहेत – म्हणजेच सद्गुरु श्रीअनिरुद्धबापू ज्या श्रीमद्पुरुसार्थाला ज्या ‘मधा’ची उपमा देतात, तशीच औषधी व मधुर.
‘प्रेमप्रवास’ आणि ‘सत्यप्रवेश’ हे एकेमेकांपासून वेगळे नाहीत आणि हे दोन्ही आनंददायीच आहेत.

Matruvatsalyavindanam (Marathi)

हा ग्रंथ म्हणजे आई महिषासूरमर्दिनी चण्डिकेच्या वात्सल्याचाच आविष्कार. सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूंद्वारा विरचित हा ग्रंथ तिच्या कार्याची, चरित्र व हेतूची ओळख तर करून देतोच पण ह्या आईच्या मायेची जाणीव करून देऊन, तिचा पदर धरून रहाणे शिकवतो. श्रद्धावानांना तिच्या छत्रछायेचे आश्वासन देतो.
ह्या आईचे प्रेम मानवी जीवनाला सामर्थ्य पुरवणारी शक्ती आहे. शुभ तत्त्वाला होकार आणि अहिताला वेळीच ओळखून नकार देण्याची शक्ती; भक्ती व नैतिकता ह्यांना दृढ करणारी शक्ती आणि साहजिकच तिच्या पुत्राचे -परमात्म्याचे प्रेम प्राप्त करण्याचा, त्याच्या जवळ जाण्याचा मार्ग. तिचे रूप सौम्य असो की उग‘, ती भक्तप्रेमापोटीच व कार्यहेतूप्रमाणे ते धारण करते व तिची सर्व रूपे शुभच असून भक्तकल्याणासाठीच असतात. अंतत: सत्याचा, शुभाचाच विजय ती घडवून आणते.
गायत्रीमाता, आई महिषासूरमर्दिनी चण्डिका व अनसूया माता ह्या तीन स्तरावर कार्य करत असल्या तरी मूलत: एकच असतात.
सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापू म्हणतात की हा ग‘ंथ आदिमातेचे गुणसंकीर्तनही आहे, ही ज्ञानगंगा आहे आणि भक्तीभागिरथीही आहे. सर्व श्रद्धावानांसाठी सर्व काळासाठी सद्गुरु श्रीअनिरुद्धबापूंनी दिेलेले आदिमातेच्या प्रेमाचे, रक्षणाचे आणि आधाराचे आश्‍वासन म्हणजे ‘मातृवात्सल्यविंदानम्’

Matruvatsalyavindanam (Hindi)

यह परमपावन कार्य, जैसे इसका नाम दर्शाता है, माँ चंडिका के वात्सल्य का प्रत्यक्षीकरण है। सगुरु श्री अनिरुद्ध रचित यह कार्य भक्तों को केवल महिषासुरमर्दिनी माता चंडिका के आदर्श, कार्य और भूमिका से ही जोड़ने के लिए नहीं है, बल्कि उसके वात्सल्य से और उसकी हमारी संरक्षा के प्रति तत्परता से हमें अवगत कराना है।
वे चाहते हैं कि हम माता के प्रेम को जानें और उस शक्ति को पहचाने – वह शक्ति जो दुष्टता या बुराई से लड़ने की है, वह शक्ति जो नैतिक गुण और भक्ति के परिणामों से निश्चल आनंद की प्राप्ति कराती है। वह भले ही उग्र दिखती हो, वही सच्ची भक्त की सुरक्षा करती है और दुष्टों का नाश करती है। उस ने अपने उद्देश्य के मुताबिक – सच्चाई, पवित्रता, प्रेम और आनंद के नियमों की सुरक्षा हेतु यह भूमिका अपनाई है और वह इसकी प्राप्ति करती ही है।
गायत्री माता, महिषासुरमर्दिनी चंडिका माता और अनसूया माता एक ही है। विभिन्न स्तर के कार्यों के अनुसार माता रूप धारण करती है। जैसा कि सद्गुरु श्री अनिरुद्ध कहते हैं, यह कार्य माता की कीर्तियों का गुणसंकीर्तन है। यह एक ‘ज्ञान-गंगा’ है, और ‘भक्ति-भागीरथी’ है। यह कार्य ज्ञान एवं भक्ति के पथ पर चलकर भगवंत या यहाँ पर माता चंडिका के बोध के प्रति संतोष प्रदान करता है।
यह चिरकाल तक मार्गदर्शन करनेवाला यह ग्रन्थ सद्गुरु श्री अनिरुद्ध जी द्वारा लिखे गए उन के अन्य कार्यों की तरह भक्तों को प्रेम और आधार देता है।

Happy English Stories - Series I - Sai for Me

Today, English is no longer a language merely for learning; it is the most common language in which people communicate with one another. Therefore, it has become a must for everybody to have at least an elementary knowledge of English. The inferiority complex of conversing in English, the boring task of looking for meanings of difficult words from the dictionary, and things such as these, have kept people away from conversing in English even when required.

The book which is born out of the untiring efforts of Dr. (Mrs.) Nanda Aniruddha Joshi, offers a fragrant and flowering garden of words and vocabulary covering the elementary as well as the subtler aspects of the English language not just for the BEGINNERS, but for the those who are well versed in the English language.

Shreemad Pursharth Granthraj - Aanandsadhana Economy Edition (Marathi)

‘आनंदसाधना’ म्हणजे मर्यादामार्गावर परमेश्‍वरावर प्रेम करत वाटचाल करत असताना आनंद प्राप्त करून घेण्याचे विविध उपाय. ‘साधना’ म्हणजे खडतर जीवनपद्धती नसून ‘साधना’ म्हणजे उचित ध्येयाच्या दिशेने केलेले पुरुषार्थी प्रयास आणि ही अशी साधना नेहमीच सद्गुरुकृपेशी जोडणारी म्हणजेच सद्गुरुंच्या सोबत, त्यांच्या प्रेमासोबत जोडणारी – जीवनामध्ये सत्यप्रवेश घडणे म्हणजेच जीवनाचा प्रेमप्रवास आणि जीवनामध्ये आनंदसाधना.
‘पूजन’, ‘व‘त’, ‘उपासना’, ‘तपश्‍चर्या’ हे सर्व भगवंताच्या अधिकाधिक जवळ नेणारेच असतात. ह्या खंडामध्ये सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापू सर्वसामान्यांना ह्या संकल्पनांचा खरा अर्थ समजावून सांगतात. शिवाय ‘पुरुषार्थगंगा’ ह्या विभागामध्ये सद्गुरु-परमत्म्याकडून म्हणजेच सर्वोच्च स्थानाकडून आपल्याकडे आलेला पवित्र व मंगल प्रेमगंगेचा असा प्रवाह, जो रोजच्या जीवनामध्ये आपल्याला सामर्थ्य आणि आनंदाची प्राप्ती तर करून देतोच शिवाय मर्यादामार्गावर दृढ करून एका बाजूने सद्गुरुंबरोबर जोडलेले ठेवतो व दुसर्‍या बाजूने कुटुंब, समाज, ह्या संस्थांचे घटक म्हणूनही आपला विकास घडवून आणतो. ह्या प्रवाहाच्या तीर्थाचे सेवनम्हणूनच सर्वार्थाने हितकारी!
तेव्हा ‘आनंदसाधना’ म्हणजे प्रेमप्रवास करत असलेल्या श्रद्धावानांसाठी आनंदाची साधना व हेच सत्य.

Textbook of Disaster Management (Marathi)

आपल्या आजूबाजूला घडत असलेल्या मानवनिर्मित आणि नैसर्गिक आपत्तींची वाढती संख्या लक्षात घेता आपत्तींना उचित प्रतिसाद कसा द्यावा, धैर्याने सामोरे कसे जावे ह्याबाबतचे प्रशिक्षण, येणार्‍या काळात प्रत्येक नागरिकाच्या हिताचे तर ठरेलच, पण त्याचे ते कर्तव्यही असेल आणि हे पुस्तक नेमका हाच हेतू साध्य करते.

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Textbook of Disaster Management (English)


Going by the increasing trend of disasters happening around us be its natural or manmade, it would, in due course of time, become incumbent upon every citizen of this country to be aware of how to respond to and handle disasters. This textbook facilitates this.

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