Showing 37–72 of 103 results


Language Guide For Travellers - Part I

Bharatiya Bhasha Sangam has been founded to foster love among the people speaking different Indian languages under the guidance of Sadguru Shree Aniruddha Bapu. India has many States and in each state, a different language is spoken. This book – “Bharatiya Bhasha Sangam – Travel Guide” is published with the intent of making possible atleast the primary conversation with the locals while traveling across the states of India. The book contains a collection of all the important words and sentences required during our travel. As of now the book features translations in 9 Indian languages. We hope that this book would prove to be helpful during your travel.

30

Language Guide For Travellers - Part II

Bharatiya Bhasha Sangam has been founded to foster love among the people speaking different Indian languages under the guidance of Sadguru Shree Aniruddha Bapu. India has many States and in each state, a different language is spoken. This book – “Bharatiya Bhasha Sangam – Travel Guide” is published with the intent of making possible atleast the primary conversation with the locals while traveling across the states of India. The book contains a collection of all the important words and sentences required during our travel. As of now the book features translations in 9 Indian languages. We hope that this book would prove to be helpful during your travel.

30

Matruvaatsalyavindaanam (English)

This great work has taken form from the dialogue between ShreeGuru Dattatreya and His disciple Shree Parshuram. It is an easy and simple account of the Aadimata Chandika’s Tridha form that is the Aadimata Gayatri, the Aadimata Mahishasurmardini and the Aadimata Anasuya. Describing this memoir, Sadguru Shree Aniruddha writes – “This is a sacred work, this is a gunasankirtan or praise of the attributes, it is the Ganges of knowledge, it is also the Bhagirathi of Bhakti (bhakti that flows from the bhakta back to the source, the Almighty) and, of course, the narrative about the Aadimata. But over and above all of this, it is the Shubhankara and the Ashubhanashini manifestation of my Aadimata; it is Her gentle motherly affection, and it is also Her grace and blessing.”

350

Matruvatsalya Upanishad (Hindi)

श्रद्धावानों के फलस्वरूप, उनके जीवन को उचित दिशा प्रदान करने की तीव्र उत्कंठा के फलस्वरूप सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने हमें आदिमाता की प्रेमकॄपा का आश्वासन दिया। मां चण्डिका की क्षमा, रक्षण अर्थात आधार, वे इस ग्रंथ के माध्याम से हम तक पहुंचा रहे हैं। श्रद्धावानों के मन मे उठनेवाले सभी प्रश्नों को, भय को दूर करके भक्ती और सामर्थ्य को दृढ करनेवाला यह सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। ऐसा हितकारक बदलाव लानेवाला यह ग्रंथ सिर्फ दिशादर्शक ही नहीं है बल्कि, चण्डिकाकुल की कृपा के फलस्वरूप, इस दिशा में प्रवास करनेवालों को ताकत भी प्रदान करता है। मां चण्डिका की ओर ले जानेवाला मार्ग सदैव खुला रहता है, द्वार खुला रहता है इसका आभास करवानेवाला यह ग्रंथ हमारे अंदर मे अनेको बंद दरवाजो को आसानी से खोल देता है, हमारे मन की अनेक बाधाओं की आसानी से दूर करता है और इस मां की कृपा के खुले मार्ग पर ले आता है। जब ऐसा होता है तब ही मां के नजदीक ले जानेवाले खुले द्वार का आभास होता है और यह कार्य यह ग्रंथ अर्थात सदगुरु की उत्कंठा के शब्द निश्चित रुप से संम्पन्न करता है।

300

Matruvatsalya Upanishad (Marathi)

श्रद्धावानांच्या प्रेमापोटी, त्यांच्या जीवनाला उचित दिशा मिळावी ह्या कळकळीपोटी सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापूंनी आपल्याला दिलेले आदिमातेच्या प्रेमकृपेचे आश्वासन. आई चण्डिकेची क्षमा, रक्षण आणि अर्थातच आधार ह्या ग‘ंथामधून आपल्यापर्यंत ते पोहोचवतात. श्रद्धावानाच्या मनातील सर्व प्रश्‍न, भय दूर करून भक्ती आणि सामर्थ्य दृढ करणारा हा सर्वश्रेष्ठ ग‘ंथ आहे. हा हितकारक बदल घडवणारा हा ग‘ंथ केवळ दिशादर्शकच नाही तर चण्डिकाकुलाच्या प्रेमामुळे ह्या दिशेने प्रवास करण्याची ताकदही देतो. आई चण्डिकेकडे नेणारा मार्ग सदैव खुला असतो, द्वार उघडे असते ही जाणीव करून देणारा हा ग‘ंथ आपल्या आतमधली अनेक बंद द्वारे अलगद उघडतो, आपल्या आतमधील अनेक अडथळे अलगद दूर करतो आणि ह्या आईच्या कृपेच्या मोकळ्या मार्गावर आणतो. असे जेव्हा घडते, तेव्हाच आईच्या जवळ नेणार्‍याखुल्या द्वाराची जाणीव होते. आणि हे कार्य हा ग‘ंथ, म्हणजेच सद्गुरुंचा कळकळीचा शब्द नक्कीच साध्य करतो.

300

Matruvatsalyavindanam (Hindi)

यह परमपावन कार्य, जैसे इसका नाम दर्शाता है, माँ चंडिका के वात्सल्य का प्रत्यक्षीकरण है। सगुरु श्री अनिरुद्ध रचित यह कार्य भक्तों को केवल महिषासुरमर्दिनी माता चंडिका के आदर्श, कार्य और भूमिका से ही जोड़ने के लिए नहीं है, बल्कि उसके वात्सल्य से और उसकी हमारी संरक्षा के प्रति तत्परता से हमें अवगत कराना है।
वे चाहते हैं कि हम माता के प्रेम को जानें और उस शक्ति को पहचाने – वह शक्ति जो दुष्टता या बुराई से लड़ने की है, वह शक्ति जो नैतिक गुण और भक्ति के परिणामों से निश्चल आनंद की प्राप्ति कराती है। वह भले ही उग्र दिखती हो, वही सच्ची भक्त की सुरक्षा करती है और दुष्टों का नाश करती है। उस ने अपने उद्देश्य के मुताबिक – सच्चाई, पवित्रता, प्रेम और आनंद के नियमों की सुरक्षा हेतु यह भूमिका अपनाई है और वह इसकी प्राप्ति करती ही है।
गायत्री माता, महिषासुरमर्दिनी चंडिका माता और अनसूया माता एक ही है। विभिन्न स्तर के कार्यों के अनुसार माता रूप धारण करती है। जैसा कि सद्गुरु श्री अनिरुद्ध कहते हैं, यह कार्य माता की कीर्तियों का गुणसंकीर्तन है। यह एक ‘ज्ञान-गंगा’ है, और ‘भक्ति-भागीरथी’ है। यह कार्य ज्ञान एवं भक्ति के पथ पर चलकर भगवंत या यहाँ पर माता चंडिका के बोध के प्रति संतोष प्रदान करता है।
यह चिरकाल तक मार्गदर्शन करनेवाला यह ग्रन्थ सद्गुरु श्री अनिरुद्ध जी द्वारा लिखे गए उन के अन्य कार्यों की तरह भक्तों को प्रेम और आधार देता है।

300

Matruvatsalyavindanam (Marathi)

हा ग्रंथ म्हणजे आई महिषासूरमर्दिनी चण्डिकेच्या वात्सल्याचाच आविष्कार. सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूंद्वारा विरचित हा ग्रंथ तिच्या कार्याची, चरित्र व हेतूची ओळख तर करून देतोच पण ह्या आईच्या मायेची जाणीव करून देऊन, तिचा पदर धरून रहाणे शिकवतो. श्रद्धावानांना तिच्या छत्रछायेचे आश्वासन देतो.
ह्या आईचे प्रेम मानवी जीवनाला सामर्थ्य पुरवणारी शक्ती आहे. शुभ तत्त्वाला होकार आणि अहिताला वेळीच ओळखून नकार देण्याची शक्ती; भक्ती व नैतिकता ह्यांना दृढ करणारी शक्ती आणि साहजिकच तिच्या पुत्राचे -परमात्म्याचे प्रेम प्राप्त करण्याचा, त्याच्या जवळ जाण्याचा मार्ग. तिचे रूप सौम्य असो की उग‘, ती भक्तप्रेमापोटीच व कार्यहेतूप्रमाणे ते धारण करते व तिची सर्व रूपे शुभच असून भक्तकल्याणासाठीच असतात. अंतत: सत्याचा, शुभाचाच विजय ती घडवून आणते.
गायत्रीमाता, आई महिषासूरमर्दिनी चण्डिका व अनसूया माता ह्या तीन स्तरावर कार्य करत असल्या तरी मूलत: एकच असतात.
सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापू म्हणतात की हा ग‘ंथ आदिमातेचे गुणसंकीर्तनही आहे, ही ज्ञानगंगा आहे आणि भक्तीभागिरथीही आहे. सर्व श्रद्धावानांसाठी सर्व काळासाठी सद्गुरु श्रीअनिरुद्धबापूंनी दिेलेले आदिमातेच्या प्रेमाचे, रक्षणाचे आणि आधाराचे आश्‍वासन म्हणजे ‘मातृवात्सल्यविंदानम्’

275

Mi Pahilela Bapu (Hindi)

डॉ. अनिरुद्ध जोशीजी (बापूजी) के हरफनमौला व्यक्तित्व की पहचान करानेवाली, संक्षिप्त में संकलित की गई एक अनोखी पुस्तक – मैंने देखे हुए बापू।

250

Mi Pahilela Bapu (Marathi)

डॉ. अनिरूद्ध जोशींच्या (बापूंच्या) अष्टपैलू व्यक्तीत्वाची ओळख सांगणारे, संक्षिप्त पद्धतीने संकलित केलेले एक आगळेवेगळे पुस्तक – मी पाहिलेला बापू

250

Nahu Tuziya Preme - Audio CD

On the 26th of May, 2013, mega event was organized, a grand evening in the world of devotion and devotional music, in which selected abhangas right from the first cassette Bol Bol Vaache, Ailtiri Pailtiri, Pipasa 1 & 2, Pipasa Pasarli, Vahini Mhane, Bapu Thy Grace till Kaay Goad Guruchi Shaala, was sung live. The Audio CD of the same is now available.

100

Nahu Tuziya Preme - Video DVD

On the 26th of May, 2013, mega event was organized, a grand evening in the world of devotion and devotional music, in which selected abhangas right from the first cassette Bol Bol Vaache, Ailtiri Pailtiri, Pipasa 1 & 2, Pipasa Pasarli, Vahini Mhane, Bapu Thy Grace till Kaay Goad Guruchi Shaala, was sung live. The Video DVD of the same is now available.

300

Peedanashak (पीडानाशक) Sudeep

दुष्प्रारब्धामुळे प्रापंचिक मानवास शारीरिक, मानसिक किंवा अन्य प्रकारच्या पीडा सतावत असतात. या पीडामुळे त्या व्यक्तीचे, तसेच त्याच्या कुटुंबाचे जीवन कष्टय बनते. या पीडांचा नाश व्हावा यासाठी, तसेच पीडानिवारण झाल्यावरही श्रद्धावान ‘पीडानाशक सुदीप’ अर्पण करतात.

900

Pipasa Audio CD (Marathi) Part 1

१) बापू भेटला ज्या क्षणी २) सामोरी बैसला कैसा ३) मनाची ही वृत्ती ४) तुझ्यासाठी बापू ५) सावळ्या रे घननीळा ६) होऊनी बेभान ७) नारळीचे झाडाखाली ८) शबरीची उष्टी बोरे

150

Pipasa Audio CD (Marathi) Part 2

१) नाम घेता उरापोटी ब्रम्ह धरीते आकृती २) अनिरुद्धाच्या चरणस्पर्शे ३) तुझ्या चरणांची धूळ ४) शामल सुंदर हृदयी पळभर ५) मज जवळ घे रे ६) करितो आम्ही इतुकी सेवा ७) चल चल जाऊ नारदाच्या गावा ८) युगे युगे मी मार्ग चाललो

150

Pipasa Pasarli Audio CD (Marathi)

१) ॐकार व्यापका अनिरुद्ध नाथा २) राम कृष्ण एक ३) नाम घ्यावे म्हणूनी ४) योग्यायोग्य जैसा असे बापू पायी ५) सख्या अनिरुद्ध प्रेमळा ६) प्राब्धाचे बीज ७) हसला माझा देव ८) कृष्ण उगाळीतो चंदन

150

Ramnaam Book (Set of 4)

Ramnaam Book (Print Copy – 4 Books in one set)

Aniruddha’s Universal Bank of Ramnaam implies a notebook which gives the devotees an opportunity to recollect the sacred name of God. Every page of the book has Lord Hanumanta’s image watermarked in the background, on which the devotees get the golden opportunity to write various names of God. While writing Ramnaam notebook we get connected with the divine name of the Lord which we chant while writing it. This is the biggest benefit of writing the Ramnaam books.

160

Rashtriya Swayamsevak Sangh - A Peerless Organization In The World (English)

The Rashtriya Swayamsevak Sangh was founded in the year 1925. The seed that Dr. Keshav Baliram Hedgewar sowed ninety years back, has now grown into a huge Banyan tree – A Vatavriksha of immense expanse and stature. So, just how many branches and how many leaves this vast Vatavriksha might have, is not in the least easy to keep count of. The fact remains all the same, that this organization stands erect – tall and competent, its roots embedded very deep in the Bharatiya mind and mindset; and is developing at the pace and on the lines of the Vatavriksha – an expansive Banyan tree indeed. Not limiting itself to this country, the Sangh is active in every such country, that the Bharatiya finds himself in. The Rashtriya Swayamsevak Sangh is in fact, not merely an organization, it has become a tradition, a tradition that bonds firm, the Bharatiya living abroad, with his motherland, with his culture.

300

Rashtriya Swayamsevak Sangh - Vishwa Ka Adwitiya Sangathan (Hindi)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना सन 1925 में हुई। डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार ने नब्बे वर्ष पहले बोये हुए बीज का रूपान्तरण अब एक विशाल वटवृक्ष में हो चुका है। इस वटवृक्ष की शाखाएँ कितनीं, पत्ते कितने इसकी गिनती करना मुश्किल है। लेकिन यह संगठन भारतीय जनमानस में बहुत ही दृढ़तापूर्वक अपनी जड़ें फ़ैलाकर समर्थ रूप में खड़ा है और वटवृक्ष की ही गति एवं शैली में विकास कर रहा है। केवल देश में ही नहीं, बल्कि जहाँ कहीं भी भारतीय हैं, उन सभी देशों में संघ कार्यरत है ही। इतना ही नहीं, बल्कि विदेशस्थित भारतीयों को अपने देश के साथ, संस्कृति के साथ दृढ़तापूर्वक जोड़कर रखनेवाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यह मात्र एक संगठन नहीं, बल्कि परंपरा बन चुका है।

275

Rashtriya Swayamsevak Sangh - Vishwanu Adwitiya Sangathan (Gujarati)

૧૯૨૫ની સાલના દશેરાના શુભદિને રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ ની સ્થાપના થઈ. ડૉ. કેશવ બળીરામ હેડગેવારજીએ નેવું વર્ષ પૂર્વે જેનું બીજારોપણ કરેલું એ વટવૃક્ષની આજે કેટકેટલી શાખાઓ વિસ્તરી છે, એના જે વિધવિધ પર્ણો પલ્લવિત થયાં છે એની ગણતરી કરવી કઠિન છે. પરંતુ આજે ભારતીય જનમાનસમાં આ સંગઠનના મૂળ ઊંડે સુધી વિસ્તરેલાં છે અને એ પણ સમર્થ અને સશક્તપણે અને આજે આ સંગઠન વટવૃક્ષની ગતિ અને શૈલી પ્રમાણે વિકાસ કરી રહ્યું છે. આ સંગઠનનો પ્રસાર માત્ર ભારત પૂરતો જ મર્યાદિત નથી રહ્યો પણ પરદેશમાં સુધ્ધાં જે જે સ્થળે ભારતીય વસેલ છે ત્યાં ત્યાં એની છાયા વિસ્તરી છે. સંઘની વિદેશમાંની શાખાઓ વિદેશવાસી ભારતીયોને પોતાની માતૃભૂમિ સાથે, મૂળભૂત સંસ્કૃતિ સાથે મજબૂત રીતે સાંકળી રાખનારી એક કડીરુપ છે. રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ એક સંસ્થા માત્ર નથી, એ સ્વદેશ સાથે સંયોજન કરનારી જીવનદોર છે! પરંપરા છે!

275

Rashtriya Swayamsevak Sangh - Vishwatil Adwitiya Sanghatan (Marathi)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 1925 साली स्थापन झाला. डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार यांनी नव्वद वर्षांपूर्वी रोवलेल्या बीजाचे आता विशाल वटवृक्षात रूपांतर झाले आहे. या वटवृक्षाच्या शाखा किती, पाने किती याची मोजदाद करणे अवघड आहे. पण ही संघटना भारतीय जनमानसात खूप खोलवर आपली मुळे रोवून समर्थपणे उभी आहे आणि वटवृक्षाच्याच गती आणि शैलीने विकास करीत आहे. केवळ देशातच नाही, तर जिथे जिथे म्हणून भारतीय आहेत, त्या त्या देशांमध्ये संघ कार्यरत आहेच. इतकेच नाही, तर परदेशातील भारतीयांना आपल्या देशाशी, संस्कृतीशी घट्टपणे जोडून ठेवणारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही संघटना नाही, तर परंपरा बनलेली आहे.

275

Runadnyapak Stotra - Marathi Audio CD

१. सद्‌गुरु श्री अनिरुध्द ऋणज्ञापक स्तोत्र
२. अनिरुध्द योग – ॐ नमो अनिरुद्धनाथा
३. आरती – येई वो अनिरुध्दा
४. अभंग – आम्ही राहतो भक्तघरी

75

Sadguru Upasana - Bengali Audio CD

1. Jap – Om Dram Dattatreyay Namah
2. Jap – Om Manasamarthyadata Shree Aniruddhay Namah
3. Dhyanmantra
4. Kleshnivaraka Shree Aniruddha Kavach
5. Shree Ramaraksha
6. Shree Hanuman Chalisa
7. Ghorkashotodharan Stotra
8. Aarti

30

Sadguru Upasana - Gujarati Audio CD

1. Jap – Om Dram Dattatreyay Namah
2. Jap – Om Manasamarthyadata Shree Aniruddhay Namah
3. Dhyanmantra
4. Kleshnivaraka Shree Aniruddha Kavach
5. Shree Ramaraksha
6. Shree Hanuman Chalisa
7. Ghorkashotodharan Stotra
8. Aarti

30

Sadguru Upasana - Kannada Audio CD

“1. Jap – Om Dram Dattatreyay Namah
2. Jap – Om Manasamarthyadata Shree Aniruddhay Namah
3. Dhyanmantra
4. Kleshnivaraka Shree Aniruddha Kavach
5. Shree Ramaraksha
6. Shree Hanuman Chalisa
7. Ghorkashotodharan Stotra
8. Aarti”

30

Sadguru Upasana - Marathi Audio CD

१. ऒम द्रां दत्तात्रेयाय नम:
२. ओम मन:सामर्थ्यदाता श्रीअनिरुद्धाय नम:
३. ध्यानमंत्र
४. क्लेशनिवारक श्रीअनिरुद्ध कवच
५. श्रीरामरक्षा
६. श्रीहनुमानचलीसा
७. घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र
८. आरती

100

Sadguru Upasana - Telugu Audio CD

1. Jap – Om Dram Dattatreyay Namah
2. Jap – Om Manasamarthyadata Shree Aniruddhay Namah
3. Dhyanmantra
4. Kleshnivaraka Shree Aniruddha Kavach
5. Shree Ramaraksha
6. Shree Hanuman Chalisa
7. Ghorkashotodharan Stotra
8. Aarti

30

Sai Niwas - Hindi Video CD

सद्य पिपा (आप्‍पासाहेब दाभोलकर) और चेतनसिंह दाभोलकर के भावों को इतना अच्छे से फिल्माया गया है की, देखनेवाला अपनेआपको भूल जाता है।
जब सी.डी. पूरी हो गयी तो ऐसा लगा की ४५ मिनट आँख झपकते ही बीत गए। साईंनिवास पर बनी हुई डाक्यूमेंट्री का हमारे पास होना एक अनमोल खज़ाना है।

200

Sai Niwas - Marathi Video CD

सद्यपिपा (आप्‍पासाहेब दाभोलकर) व चेतनसिंह दाभोलकर यांच्या भावनांना इतक्या सुंदर प्रकारे सादर केले आहे की पाहणारा स्वत:लाच विसरुन जातो. जेव्हा सी.डी. संपली तेव्हा असे वाटले की ४५ मिनिटे पापणी मिटतातच संपली. ही सी.डी आपल्याकडे असणे म्हणजे एक अनमोल खजीना आहे.

200

Sai Tuzya Charani - Marathi Audio CD

परम पूज्य सूचितदादांच्या आवाजातील,
श्रीसाईसच्चरित – अध्याय ११
श्रीसाईसच्चरित – अध्याय २२
श्रीसाईसच्चरित – अध्याय ३३

150

Shree Gurukshetra Mantra - Marathi Audio CD

॥ हरि ॐ॥
।।ॐ श्रीदत्तगुरवे नम:॥
श्रीगुरुक्षेत्र-बीजमन्त्र
ॐ ऐं र्हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै – सर्वाबाधाप्रशमनं-श्रीगुरुक्षेत्रम्।
ॐ ऐं र्हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै – सर्वपापप्रशमनं-श्रीगुरुक्षेत्रम्।
ॐ ऐं र्हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै – सर्वकोपप्रशमनं- श्रीगुरुक्षेत्रम्।
ॐ ऐं र्हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै – त्रिविक्रमनियलं- श्रीगुरुक्षेत्रम्।
ॐ ऐं र्हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै – सर्वसमर्थं सर्वार्थसमर्थं-श्रीगुरुक्षेत्रम्।।

श्रीगुरुक्षेत्र-अंकुरमन्त्र
ॐ रामात्मा-श्रीदत्तात्रेयाय नम:।
ॐ रामप्राण-श्रीहनुमन्ताय नम:।
ॐ रामवरदायिनी-श्रीमहिषासुरमर्दिन्यै नम:।
ॐ रामनामतनु-श्रीअनिरुद्धाय नम:।।

श्रीगुरुक्षेत्र-उन्मीलन मन्त्र(कलिकापुष्पफलमन्त्र)
ॐ मानवजीवात्मा-उद्धारक-श्रीरामचन्द्राय नम:।
ॐ मानवप्राणरक्षक – श्रीहनुमन्ताय नम:।
ॐ मानववरदायिनी – श्रीआह्लादिन्यै नम:।
ॐ मानवमन:सामर्थ्यदाता-श्रीअनिरुद्धाय नम:॥

35

Shree Mahadurgeshwar Prapatti Pustika Hindi (set of 10)

Shree Mahadurgeshwar Prapatti Pustika Hindi – Print Copy (set of 10)

100

Shree Mahadurgeshwar Prapatti Pustika Marathi (set of 10)

Shree Mahadurgeshwar Prapatti Pustika Marathi – Print Copy (set of 10)

100

Shree Shabda Dhyanyog - Marathi (set of 5)

Shree Shabda Dhyanyog – Marathi – Print Copy (set of 5)

175

Shree Shwasam Guhyasooktam ENGLISH Audio CD

Shree Shwasam Guhyasooktam ENGLISH Audio CD

51

Shree Shwasam Guhyasooktam GUJARATI Audio CD

Shree Shwasam Guhyasooktam GUJARATI Audio CD

51